बलिहारी बलिहारी म्हारा सतगुरुवा ने बलिहारी लिरिक्स इन हिंदी
बलिहारी बलिहारी, म्हारा सतगुरुवा ने बलिहारी |
बंधन काट किया जीव मुक्ता, और सब विपति विडारी |
वाणी सुणत परम सुख उपज्या, दुर्मति गई हमारी |
करम भरम का शंसय मेट्या, दिया कपाट उघारी || १ ||
माया ब्रह्म भेद समझाया, सोहम लिया विचारी |
पूरण ब्रह्म रहे उर अन्दर, काहे से देत विडारी || २ ||
मौ पे दया करी मेरा सतगुरु, अबके लिया उबारी |
भव सागर से डूबत तारया, ऐसा पर उपकारी || ३ ||
गुरु दादू के चरण कमल पर, रखू शीश उतारी |
और क्या ले आगे रखू, सादर भेंट तिहारी || ४ ||
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Balihari Balihari Mhara Satguruva Ne Balihari Lyrics
Balihari Balihari, mhara Satguruva ne balihari
Bandhan kaat kiya jeev mukta, aur sab vipati vidaari
Vaani sunat param sukh upjya, durmati gayi hamaari
Karam bharam ka shanshay metya, diya kapaat ughaari || 1 ||
Maaya Brahm bhed samjhaaya, Soham liya vichaari
Puran Brahm rahe ur andar, kaahe se det vidaari || 2 ||
Mau pe daya kari mera Satguru, abke liya ubaari
Bhav saagar se doobat taaraya, aisa par upkaari || 3 ||
Guru Dadu ke charan kamal par, rakhu sheesh utaari
Aur kya le aage rakhu, saadar bhent tihaari || 4 ||
FAQs for बलिहारी बलिहारी म्हारा सतगुरुवा ने बलिहारी लिरिक्स:
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बलिहारी बलिहारी म्हारा सतगुरुवा ने बलिहारी भजन किसने लिखा है?
यह भजन संत दादू दयाल जी द्वारा रचित है। -
इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
यह भजन सतगुरु की महिमा और कृपा का वर्णन करता है। -
क्या यह भजन भक्ति गीतों में आता है?
हाँ, यह एक प्रमुख हिंदी भक्ति गीत है। -
इस भजन को कहां से पढ़ सकते हैं?
आप इसके लिरिक्स bhaktisongslyrics.in पर पढ़ सकते हैं। -
क्या यह भजन भजन संध्या के लिए उपयुक्त है?
बिल्कुल, यह भजन भजन संध्या व सत्संग के लिए आदर्श है।
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